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शनिवार, 20 नवंबर 2021

मुक्तक

गीत लिखने हैं तो अक्षर खोजने होंगे।
संघर्ष करने के लिए अश्रु पोंछने होंगे।
कभी बात नहीं बनती चुपचाप रहने से,
जब प्रश्न उठने हैं तो उत्तर सोचने होंगे।

लोग ऐसे हैं जो कभी प्रश्न नहीं करते।
रह भरोसे भाग्य के चुप-चाप सह लेते।
तरस आता मुझे उनकी ये नादानी पर ,
बात कहना चाहते पर कह नहीं सकते।
@स्नेही 20-11-21

प्यार के ना बोल समझे कौन है ऐसा।
जानवर भी जानता है प्यार की भाषा।
जानकर भी नफरतों के बीज बोऐं जो,
कैसे करेआदमी उनसे न्याय की आशा।

पत्थरों को तोड़ता हर रोज जो मजदूर।
अन्धविश्वासों में उलझा हो गया मजबूर।
लाचार हो कर वो खड़ा है भाग्य केआगे,
इसलिए होता रहा शोषण उसका भरपूर।
@स्नेही 21-11-21

 
 

मंगलवार, 2 नवंबर 2021

चर्चा ए चुनाव



हो रही चर्चा कि किसको वोट दोगे,
कांग्रेस को, भा.ज.पा, या आप को।
स.पा.ब.स.पा.भी कहीं कमतर नहीं,
इन निर्दलियों का भीअस्तर नाप लो।

इस बार अब तो वोटरों ने ठान ली है,
वोट नहीं देना है किसी के  नाम पर।
जाति धर्म परिवार से ऊपर  उठे जो,
सब वोट देंगे अबकी उसके काम पर।

गुरुवार, 30 सितंबर 2021

उजाला दिखा जाता!

सुबह आता चमकता चला जाता।
सूरज  नित्य उजाला दिखा जाता।
अटल है क्रम उसकेआने-जाने का,
उसको कभी कोई नहीं मिटा पाता।

उसे देखकर सब मुस्कुराया करते।
गणित  जीवन का  लगाया  करते।
दिन रात महीने वर्षों इतिहास  के,
पन्नों में उजालों को सजाया करते।

समय के साथ हमने बह जाना है।
अपनी बात को यहां कह जाना है।
घटाओं से  घिरा सूरज भले ही हो,
नदी  को तो पिघल कर  आना है।

अवरोध न बनना किसी के राहों में।
पोंधों को पनपने दो कुछ छावों में।
गुलिस्तां खिल उठेगा इक दिन सारा, 
महकता चमन होगा हमारी बाहों में।
"""@स्नेही""



गुरुवार, 16 सितंबर 2021

स्कूल की घंटी

कितनी आनंददायिनी, 
होती थी स्कूल की घंटी -
चाहे प्रार्थना की घंटी हो,
या हो छुट्टी की घंटी ।
बेसब्री से इंतजार करते थे,
स्कूल पढ़ने वाले बच्चे।
पिछले दो साल से -
नहीं बज रही है यह घंटी।
कभी छुट्टी की घंटी का इन्तजार।
उछल कूद कर करते थे इजहार।
स्कूल के नन्हे बच्चे! 
आज पहली घंटी का इन्तजार,
तरसती निगाहों से ।
किताब पाठ्यक्रम स्कूल, 
इन शब्दों को बच्चे गये हैं भूल।
याद कराया गया है,
 शिर्फ मोबाइल।
इसी पर चल रहा है,
आधा अधूरा स्कूल।





बच्चे व खेल

नींद तभी आती बच्चों को ,
जब   वे  खेला  करते   हैं।
माँ से आँख मिचौली करके,
घर   से  निकला  करते  है।

स्कूल  हमेशा  ही जीवन  का,
सृजन का उत्तम साधन होता।
मिलते  रोज  जहाँ   सहपाठी, 
गुरु का नित्यअभिवादन होता।

समय  से  अन्जान हमारे बच्चे,
चुप- चाप  घरों   में   बैठे   हैं।
शिक्षा  की  इस  व्यवस्था  पर,
वक्त   ने  ही  कान  उमैठे   हैं। 

उठते  हुए  सवालों  का  हल,
आओ    मिलकर  खोजें  हम।
जीवन के  इस   परिवर्तन  में,
सम्यकता  की   सोचें    हम।

बच्चे राष्ट्र कीअनमोल धरोहर,
तन-मन धन सब इन पर वारें ।
अखण्ड   राष्ट्र  भारत के हित,
हम  शिक्षा  की  नीति  सुधारें।




  

रविवार, 5 सितंबर 2021

कुशाग्री

कुसुम  की हो तुम सुरभि पहचान,
सम्यकता लिए हो स्नेहिल वितान।
यह मुस्कुराना है तुम्हारी हकीकत,
तुम्हारी राह हों यूं ज्ञान से विज्ञान।

शालीनता  में तुम सदा आगे रहो,
जीवन में सदा फूल ‌‌‌‌‌‌‌‌सी मुस्कुराओ।
स्वागत करो हर पल हर खुशी का.
हर खुशी को लक्ष्य तक ले जाओ।

ग्रीष्म वर्षा शरद है ऋतु तुम्हारी हो,
जीवन में  सदा विजय  तुम्हारी हो।
मेरा आशीर्वाद मेरी सद्भावनाऐं हैं,
यह  जन्मदिन तुमको मुबारक हो।


सोमवार, 30 अगस्त 2021

चुनावी रणभेरी

बज  उठी  चुनावी  रणभेरी, 
सम्भाल लिए हैं तीर कमान।
सजने लगी  सेनाऐं  सबकी,
सेना पति  देने लगे हैं बयान।
"कह रहे साथियो उठ जाओ,
गप्प मारोजितना मार सको।
प्रजातंत्र  को  गड्ढे में  तुम, 
गाड़ो जितना गाड़ सको।" 
संसद  की मर्यादा  तोड़  चुके,
तिरंगे को किया तार  तार।
पक्ष- विपक्ष  ये सभी दलों के,
सब  नेता  गण थे  शर्मसार ।
उतर गये फिर सब  समर में,
लज्जा  का  कोई  भान  नहीं।
राज नीति  की  प्रतिद्वंद्विता में,
कोई  मान सम्मान कहीं ।
अब कोई  दूध के धुले नहीं हैं,
हैं  एक  ही थैली  के चट्टे -बट्टे।
खबरदार जागरूक  मतदाता,
कभी लालच में  पैर  न  रपटे।
धर्म  जाति  की बात  करे जो,
उसको  समझो  सबसे  झूठा।
करता  बुराई  औरों  की  जो,
उसने  भी  जनता को  लूटा।
कौन -कौन  दल बदलू  हैं ये -
कौन -कौन   रहे  भ्रष्टाचारी। 
 बहकावे  में तुम मत  आना, 
मतदान की रखना समझदारी।







राखी का त्योहार

राखी का त्योहार आ गया,हो बहना काअभिनंदन। प्रेम प्रतीक भाई बहन का,हमने माना है रक्षा बंधन। सदियों से सुनती आई है बेचारी केवल अबला  है। शोषित ...