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सोमवार, 21 मार्च 2022

आशा

फूलों सा कोमल हृदय,
मुख पर नित मुस्कान उदय।
दुर्भाव नहीं तिल भर मन में,
बीते यह जीवन निर्भय।
सौ बार जमीं पर गिरें भले,
सम्भलें आगे बढ़ते जाऐं।
संघर्ष कभी कमजोर न हो,
हम शिखर चढ़ते जाऐं।
हृदय में सहिष्णुता हो,
 इंसान का हम सम्मान करें।
कर्तव्यपरायण हो जाऐं,
ये राष्ट्र पर अभिमान करें।
वंचित न हो कोई यहां,
सबको यहांअधिकार मिले।
शोषित हैंअभी जो यहाँ,
उनको राष्ट्र का प्यार मिले।
 

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