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मंगलवार, 6 मई 2025

क्रिसमस दिवस

बच्चो आज सुनो कहानी तुम संत निकोलस की।
सदा चला जो राहों पर अपने पैगंबर जीजस की।
राजा के घर जन्मा उसे सदा गरीबों से प्यार रहा।
निर्धन की सेवा करनेको वह दिन-रात तैयार रहा।
नये नये परिधान पहनकर  बच्चों को जो भाता था।
बड़े सबेरे उनके घर में वो खिलौने रख जाता था।
हिम प्रदेश का वासी जिसका शुद्ध निर्मल मन था।
हमसे बड़ा होने पर भी उसमें हम सा  बचपन था।
एक बार की बात गांव में एक निर्धन बुढिया रहती।
तीन पुत्रियों के साथ वह एक झोपड़ी में वो रहती।
पैसे नहीं थे पास उसके और पुत्रियां जवान हो गई।
अब कैसे शादी हो इनकी वह बहुत परेशान हो गई।
इसकी भनक जब लगी संत को चुपके आया घर में।
सोने के सिक्के थैली में बन्द कर वह रख गया घर में।
सुबह उठी बहनें तीनों उन्होंने दरवाजे पर थैला देखा।
हर्षित हुए सब घर में जाना ये बदली भाग्य की रेखा। 
मानवता का कोई पुजारी जब आता है इस धरती पर।
सारे संकट दूर हो जाते रहेंगे समाज में जब मिलकर।

 



 

रविवार, 7 अप्रैल 2024

कांटों से डरो नहीं

फूलों का गर शौक हैतो काटों से डर कैसा।
इरादा मजबूत हैतो ख्याल ये मुकद्दर कैसा।
कभी धूप कभी छांव रहा करती जिन्दगी में,
साथ न हो हमसफ़र का तो ये सफर कैसा।
 
राग  में डूबे रहो तो मन में ये अनुराग कैसा।
छल कपट प्रपंच हैं भीतर फिर त्याग कैसा।
जागृत नहीं प्रज्ञाऔर चित अशुद्ध रहता हो,
गर्व न हो जिस पर हमें फिर वो काम कैसा।

बुधवार, 30 अगस्त 2023

खुशियां

सार्थक  सोच  है जिनकी,
उन्हींको वो खुशी मिलती।
जमीं   हो  धूल   सीसे  में,
कभी सूरत नहीं  दिखती।

कोई   खोजे  शिलाओं  में,
ये  कोई   भावनाओं   में।
तलाशी  हैं   मैंने   खुशियाँ, 
सभी    संभावनाओं    में।

खुशी  से  आंकते  हैं  हम,
अपना  मूल्य जीवन  का।
खुशियां  बांट ली जिनको, 
खुशी में प्यार  है  उनका।

ये जीवन  प्रेम की  सरिता,
इसे   अविरल   बहने  दो।
किसी की  राह मत  रोको,
खुशी  के फूल  खिलने दो।

खुशी दिखती जहां हमको,
वहीं   तो  प्रेम  है  समझो।
प्रेम  के  बिना      जीवन,
पूरा   वीरान  ही  समझो।

दिया  है  स्नेह जो  हमने-
उसी  से  तो  हुआ  स्नेही,
उसी के पास खुशियों का,
बड़ा भंडार  तुम   समझो।
 

चांद से रिश्ता पुराना(चन्द्रयान-3)

चंदा  से  है  रिश्ता हमारा पुराना।
बच्चों का है वो प्यारा चंदा मामा। 
कल्पना कवि की सुन्दर  सलोना,
चांदनी रात का अनुपम खिलौना

महान हैं सारे वैज्ञानिक हैं हमारे । 
जिन्होंने ये कदम चांद पर उतारे। 
फहराया तिरंगा उन्होंने चांद पर।
नाजहै हमको चन्द्रयान काज पर। 

शिल्पकारों का वर्चस्व  बना रहे,
खोज विज्ञान की सदा होती रहे।
आगाज है ये नवयुग निर्माण की,
वैज्ञानिक सोच जन कल्याण की।

स्नेहिल सुप्रभात  संदेश चांद का।
देख लिया हमने भी देश चांद का।
तिरंगा फहराया आभार है उनका।
वैज्ञानिकों ने दिया रास्ता चांद का।

इसरो इतिहास आज के दिन का।
कमाल है न्यारा चन्द्रयान तीन का।
देश का गौरव पहुंचायाआसमां पर।
सबको है गौरव ये भारत महान पर।







रविवार, 27 अगस्त 2023

गरजते हैं बरसते नहीं

छाये हैं घने बादल आसमां में, जरा देखो।
बरसने की तैयारी में हैं घटाऐं, जरा देखो। 

गरजने वाले बरसते नहीं हैं,ये कहावत है,
आसमां से हवा हो गए बादल, जरा देखो।

पांच सालों में  लहलहाती फसल वोटों की,
कौन काटेगा इस बार ये फसल, जरा देखो।

गरज रहे हैं बादलों की तरह यहां नेतागण, 
अब की बार कौन हाथ मारेगा  जरा देखो।

सड़कों पर खेतीहर मजदूर किसान बैठे हैं,
महंगाई से त्रस्त हैं बेरोजगार , जरा देखो।

कई दलबदलू मौकापरस्त नेता  हैं ताक में,
किधर लपकेंगे नेता जी इसबार जरा देखो।

प्रजातंत्र के नाम पे जनता गुमराह होती है,
प्रजा को कौन प्रसाद चटाता है जरा देखो।



गुरुवार, 20 जुलाई 2023

जंग लड़नी चाहिए

जिन्दगी है,जंग तो ये जंग लड़नी चाहिए।
है चुनौती जिंदगी,स्वीकार करनी चाहिए।

पैरों में हैं बेड़ियाँ इनसे हैं हम जकड़े हुए।
जालसाजों की टेढ़ी,दुम को हैं पकड़े हुए।
होगया है येउजालाआँख खुलनी चाहिए।
जिंदगी है जंग तो ये  जंग लड़नी चाहिए।

खाते आए ठोकरें ये दुत्कार सहते आ रहे।
बंधुवा मजदूर उनके हैं काम करते आ रहे।
स्वाभिमानी हो गये तो जंग लड़नी चाहिए।
है चुनौती जिंदगी स्वीकार  करनी चाहिए। 

जिसके हाथों में कलम हैआगे बढ़ते वो रहे।
भाग्यऔर भगवान के पीछे भरोसे हम रहे।
हो गए आजाद तो नयी बात करनी चाहिए।
है  चुनौती  जिंदगी स्वीकार  करनी चाहिए। 

जिंदगी है जंग तो अब जंग लड़नी चाहिए ।
है  चुनौती  जिंदगी स्वीकार  करनी चाहिए। 
@स्नेही




सोमवार, 3 अप्रैल 2023

रिश्ते

पारिवारिक रिश्ते हैं अब दिखाने के लिए।
वृद्धाआश्रम हैं जिन्दगी गुजारने के लिए।

अन्तिम बार बेटा मिलनेआया वृद्धाश्रम में,
वो भी अपनी मां का कंगन चुराने के लिए।

धन दौलत है तो  रिश्ते हजार बन जाते हैं,
मगर  समय नहीं है रिश्ते निभाने के लिए।

मदद  की है तुमने  कभी जिन  लोगों की,
मदद को मशहूर हैं बहाने बनाने के लिए। 

रिश्ते नहीं तो  परिवार कहां  रह गये अब,
रिश्ते रह गये  कागज में दिखाने के लिए।

संयुक्त परिवार टूटे एकांकी  हो गए  सब,
मां कहांअबआया हैं दूध पिलाने के लिए। 


क्रिसमस दिवस

बच्चो आज सुनो कहानी तुम संत निकोलस की। सदा चला जो राहों पर अपने पैगंबर जीजस की। राजा के घर जन्मा उसे सदा गरीबों से प्यार रहा। निर्धन की सेवा...