प्रेम प्रतीक भाई बहन का,हमने माना है रक्षा बंधन।
सदियों से सुनती आई है बेचारी केवल अबला है।
शोषित वंचित है भले परिवार उसी से संभला है।
संविधान से मिला है समानता का स्वर्णिम कंगन।
राखी का त्योहार आया,हो बहनों का अभिनंदन।
राखी बांधने आई बहना देखो वो सबला बनकर।
कहती आत्मविश्वास से,बांधेंगे राखी हम परस्पर।
बहना को कष्ट हुआ गर,ये राखी याद दिलाएगी।
मुश्किल में हो भाई गर तो,वो बहनादौड़े आयेगी।
भाई बहन के हृदय में,हो नव युग नव प्रेम स्पन्दन।
राखी का त्यौहार आया है,हो बहना काअभिनंदन।
