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रविवार, 27 नवंबर 2022

मना लिया करो

लग रही है गर आग तो बुझा दिया करो।
तब हाल अपने दिल का सुना दिया करो।

चुप रहने से कभी हालात नहीं बदलते,
रूठे हैंअपने तो उनको मना लिया करो।

दूर रहने से गलत फहमियां हो जाती हैं,
वक्त पर अपनों से बात कर लिया करो।

वो भी इतने बुरे नहीं थे जमाने में कभी,
उन्हें भी जमाने की याद दिला दिया करो।

देख कर दुनिया हमें सपना सा लगता है।
कभी सपनों में अपनों के खो जाया करो।

 



 







शुक्रवार, 25 नवंबर 2022

संविधान दिवस

ऐतिहसिक छब्बीस नवम्बर, 
है संविधान  दिवस  हमारा। 
इसकी सुचिता संरक्षण को,
यह पावन संकल्प हमारा ।

नफ़रत न हो कभी दिलों में,
आपस में रहे ये भाई-चारा।
मानवता हो हृदय में सबके, 
कहता है  संविधान हमारा। 

कैसे देश चले अपना यह,
कैसी व्यवस्था हो इसकी,
सबको हक मिले यहांपर,
जैसी योग्यता हो जिसकी।

हर हाथ को काम मिले व,
उचित काम के  दाम मिले,
घर घर ढेरों खुशियों फैले,
डाली -डाली  फूल  खिले।

क्या हैं मूलअधिकार हमारे,
संविधान में है सब अंकित।
कर्तव्य हमारे  निर्धारित  हैं, 
कोई न्याय से रहे न वंचित।

समता समानता बन्धुत्व पर,
आधारित संविधान हमारा।
राजनीतिक सामाजिक और-
आर्थिक न्याय से राष्ट्र संवारा।

संविधान के जनक आप हैं,
डाक्टर भीमराव अम्बेडकर।
कोटि कोटि नमन  करते  हैं,
चरणों में हम शीश झुकाकर। 









शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

तस्वीर

आ अधरों से पिला दूँ जाम तुझको,
सब्र कर कुछ देर को मुरली हटा ले।
देखके बंसी मेरे सीने में आग जलती,
तेरे प्यार में पागल हूँ ये प्यास मिटादे।

कृष्ण तुम नटखट तुम्हारा प्रेम छल है,
मुझसे अधिक बांसुरी में प्रेम प्रबल है।
मैं तुमको पूर्ण सर्वस्व अपना दे चुकी ,
और तेरे बिना बेचैन मेरा हरेक पल है।

बाँसुरी को छोड़कर मुझेआगोश में भर, 
जाम अधरों से पिला मुझे मदहोश कर।
मैं तुझमें समा जाऊं तू मुझमें समा जा,
देखती रहूँ  सदा तेरी तस्वीर  मुरलीधर।


रविवार, 23 अक्टूबर 2022

नई रोशनी


इक दीया रोशनी को जलाऐंगे हम।
रोशनी का ये त्योहार मनाऐंगे हम।
दिलों में है हमारे जो नफरत भरी।
उनको दिलों से सब मिटायेंगे हम।

भाग्य का खेल यह बहुत हो गया।
आदमी ही भगवान खुद हो गया।
धर्म के नाम पर  पाखंड रच कर,
ठगने का बहाना अद्भुत  हो गया।

अप्प दीपो भवः बचन बुद्ध के दिए।
पंचशील से शुद्ध आचरण भी दिए।
सम्यक की राह पे चलें जन गण मन,
समता बन्धुत्व के भाव बुद्ध ने दिए।

बाईस प्रतिज्ञाओं से वो रोशनी मिले।
भीम के लालों को वो मांशेरनी मिले।
प्रबुद्ध भारत के नव सृजन के लिए, 
बाईस प्रतिज्ञाओं की वो रोशनी मिले।


बुधवार, 19 अक्टूबर 2022

दीपोत्सव

आओ रोशन करें हम शहर अपने।
मिलकर सजा लें आज घर अपने ।
टूटकर बिखर गये सपने अंधेरों में,
आज सपनों से सजा लेंशहर अपने।

कभी माटी के दीये जलाये हमने भी।
अँधेरों में भटकते रहे  सब अपने भी।
आंधियों में रुकने का दम कहाँ इनमें,
रोशनी हो ये संकल्प लिया हमने भी।

यहाँ देखिए आस्थाओं का समन्दर है।
कोई  बाहर बैठा है तो कोई अन्दर है।
रोशनी चाहता हर कोई इस दुनियां में,
मगर रोशनी एक है ये घरों में अंतर है।

जिन्हें मयस्सर नहीं रोशनीअब तलक। 
अँधेरों में भटकते रहेंगे ये कब तलक।
प्रेम की रोशनी से ही होते उजले मन,
रोशन हो जाय धरा से आसमां तलक।

दीपोत्सव राष्ट्र का उत्सव मनाऐं हम।
बिना भेदभाव के हर घर सजाऐं हम।
नफ़रतों ने खाक में मिला दिया हमको,
प्रबुद्ध भारत होअब बिगुल बजाऐं हम।









मंगलवार, 18 अक्टूबर 2022

अंधेरा पसरा है


यहांअंधेरा दूर तलक पसरा है अभी।
भोर का तारा निकल रहाअभीअभी।

झरोखों से झांक कर देखो मटकों  में,
छुआछूत कितना भरा हुआ है अभी।

जंग ए आजादी लड़ी मिलकर सबने,
कुछआजादऔर कुछ गुलाम हैंअभी।

मिट्टी से यह मटका बनाया  कुम्हार ने,
मटका सछूत है कुम्हारअछूत है अभी।

बड़ी हँसी आती है उनके ज्ञान पर हमें,
जो कहें मुँह से पैदा हुए थे इन्सान कभी।

अपने मूंह मिट्ठू मत बना करो अब यहां,
जरा दूसरों की भी तो सुन लीजिए कभी।

अंधेरों में ढूढ़ते हैं भोजन उल्लू की तरह,
वो कहते हैं दिन मेंअंधेरा पसरा हैअभी।







गुरुवार, 22 सितंबर 2022

हर नजर उनके नाम

ये सांस वक्त से अनजान होती है।
पता नहीं कब सुबह शाम होती हैं।

मैं मुहब्बत दिल से करता हूँ उनसे,
तभी हर नजर उनके नाम होती है।

ख्यालआता है जब भी उनका हमें,
नियत हमारी बड़ी बदनाम होती है।

उन्होंने भुला दिया तो क्या हो गया,
हर कविता तो उनके नाम होती है।

उनके बिछुड़ने का गम भी इतना है,
हर सड़क यहां की सुनसान होती है।

क्रिसमस दिवस

बच्चो आज सुनो कहानी तुम संत निकोलस की। सदा चला जो राहों पर अपने पैगंबर जीजस की। राजा के घर जन्मा उसे सदा गरीबों से प्यार रहा। निर्धन की सेवा...