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सोमवार, 9 अगस्त 2021

भारत मेरा देश है

दिल की हर धड़कन कहती है, भारत मेरा देश है। 
सत्य अहिंसाऔर शान्ति का, रहा यहां परिवेश है।
दिल की हर धड़कन ------------- 
श्रमशील संस्कृति हमारी, आदर्श कर्म ही पूजा है।
प्रकृति की अनुपम विरासत, नहीं विश्व में दूजा है। 
बदनियती से लूटा हमको ,मन में भर दिया द्वेष है।
दिल की हर धड़कन कहती है, भारत मेरा देश है।
दिल की हर धड़कन -----------
देश प्रेम की आग दिलों में,नित्य निरन्तर रहती है।
धर्म जाति की राजनीति ही, मन मेंअन्तर करती है।
छुआछूत का रोग आज तक ,यहां युगों का शेष है। 
दिल की हर धड़कन कहती है, भारत मेरा देश है।
दिल की हर धड़कन ----------------     
अशिक्षा के  कारण ही तो, यहाँ  कुप्रथा फैली  है।
आजादी के बाद अभी तक, हरेकआंचल  मैली है। 
दो हरी व्यवस्था पनप रही  है,  गैर बराबरी शेष है।
दिल की हर धड़कन कहती है, भारत मेरा देश है।
दिल की हर धड़कन ----------------
     """@स्नेही """

शुक्रवार, 23 जुलाई 2021

शिक्षा

हिंदी कविता Magic of poetry 
विषय ----शिक्षा 
स्वरचित कविता  एन.आर.स्नेही 
रामनगर नैनीताल उत्तराखंड 
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गुरु शिष्य  के बीच अन्तरंग प्रक्रिया है ,
  चली आ रही यह सीखने की क्रिया है। 
   गुरु से मिले जो ज्ञान हमें वह दीक्षा है।
    कर्तव्य बोध हो जाय  सच्ची शिक्षा है।

शिक्षा को नित भाषा सिंचित करती है, 
  स्वर-व्यंजन से  वह विकसित होती है। 
    कर्मवीर की शक्ति दायिनी ही शिक्षा है,
      कर्मों की ही मुक्ति दायिनी ही शिक्षा है।

अन्धकार में ज्योति दायिनी शिक्षा ही है,
  वंचित कीअधिकार दायिनी शिक्षा ही है।
    अपने  मन  की अभिव्यक्ति शिक्षा ही है।
      राष्ट्रप्रेम  का  बोध हो जाना शिक्षा ही है।

पढ़ना लिखना और समझना शिक्षा ही है।
  आपस में भाई-चारा  बढ़ाना शिक्षा ही है।
    घर-घर  शिक्षा दीप जलाना शिक्षा ही है ।
      राष्ट्रप्रेम के संस्कार जगाना शिक्षा ही है ।

सच्ची शिक्षा वही जो जाने स्वतंत्रता को।
स्वाभिमान से जीये, कुचले परतंत्रता को।

बुधवार, 7 जुलाई 2021

अंधेरों से निकलना है रोशनी की तलाश हो।
अपनों से मिलने की हर मुलाकात खास हो।
निगाहों  में  घूमती  रहे हर वक्त वो  मंजिल- 
जिसको पाने का जुनून व हौसला पास हो।
"""@स्नेही """
देख रहे  मूँह सब, एक दूसरे का अब,
बातें  खूब  बना  रहे,लोग  घर  घर में।
सरकार विजन की,है डबल इंजन की,
चल नहीं पा रही है, राज  के सफर में।
कुछ दिनऔर चले,फिर चले या न चले,
जाने कैसा हाल होगा,चुनावी लहर में।
समय की मार पड़ी,है बेरोजगारी खड़ी,
परेशानी  बढ़  रही, कोरोना  कहर  में।
"""@स्नेही"""
लड़ने के बहाने बहुत हैं पर क्या फायदा।
सुलह कर लेना ये जीवन का हो कायदा।

सोमवार, 28 जून 2021

मानसून

मंच -हिंदी कविता Magic of poetry 
दिनांक 28/6/2021 विषय --"मानसून "
रचयिता -एन.आर.स्नेही रामनगर नैनीताल
 उत्तराखंड 
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मानसून नहींआया अभी,मन में है सूनापन। 
गर्मी से राहत पाने को,बैठा हूँ मैं घर आंगन।

उमड़ घुमड़ कर जब,मेघ गरजता है नभ में।
बिजली के गर्जन का,वो भय रहता है सब में।

झम झम बरषते मेघ,मन मयूर नांचते मन में।
हरियाली छा जाती,खेतों और वन उपवन में।

शोर मचाने बच्चेआते,घर से बाहर गलियों में।
थोड़ी देर राहत मिलती,जानेंआती फलियों में।

धरती को हरियाली देती, मानसून  उपहारों में। 
खेतों व खलिहानों में,सुख सावन के फुहारों में।

जाओ जल्दी मानसून,झमाझम बर्षो धरती पर।
प्रकृति मेंअमरता लाओ,मानवता को धरती  पर।


रविवार, 27 जून 2021

मानसून


जून से सितम्बर तक मेरे देशवासी,
  इन्तजार करते हैं सब मानसून का।
    टकटकी लगाए बैठे है अन्नदाता, 
      कब गगन घेर लें मेघ मानसून का।
दूर पहाड़ों से मैदान तक  मेघों का,
  हाल जानने सब देखते  हैं आसमां।
    आकर जब मेघ खूब बरसने लगे,
      लोगों को लगे धरती ये खुशनुमां।
कृषि की प्रधानता हो जिस देश में,
   सिंचाई के साधनों की हो न्यूनता।
    मानसून पर निर्भर हो जहां किसान,
      कितनी कठिन है जीवन की पूर्णता।
मानसून आकर जो समय पर बरषते, 
  खुशहाल  किसान अभिनन्दन करते।
    समृद्धिशाली है  वही राष्ट्र विश्व भर में,
      जहाँ कभी भी लोग भूख से नहीं मरते।



शुक्रवार, 25 जून 2021

छत्रपति शाहू जी महाराज



सामाजिक लोकतंत्र के आधार स्तम्भ,
महानायक छत्रपति शाहू जी महाराज।
मनुवादी व्यवस्था से पीड़ित समाज के,
बहुजन नायक का जन्म दिन है आज।

जाति विहीन  समाज के पक्षधर थे जो,
आओ  चिंतन मनन स्मरण करें उनका।
अस्पृश्यता भगाओ,शिक्षा दीप जलाओ,  
ये आदर्श संकल्पों का वरण करें उनका।

ब्राह्मणवाद को देकर चुनौती बढ़े  आगे ,
बिखरे समाज को ये नई रोशनी दिखाई।
इतिहास के पन्नों में बन्द हैं जो आज भी, 
जिन्होंने स्वतंत्रता की परिभाषा बतायी।

शत् शत् नमन कोटि-कोटि हम वंदन करें।
छत्रपति शाहू जी महाराज का स्मरण करें।

गुरुवार, 24 जून 2021

वंचित

एक आदमी के पास रोटी नहीं,
   रहने को न उसके पास मकान।
     सामाजिक अधिकारों से वंचित,
       वह बेचारा है,कहाँ करे विश्राम ?

मतदाता है वो बेेेचारा है देश का,
   हाथ फैलाकर माँग रहा है भीख।
      आजादी के नाम  पर वंचित को,
       अपनी  भाषा में दे जाते हैं सीख। 

नेताजी जिनसे वोट मांगने जाते,
   उनको तो  वे कहते  हैं  मतदाता।
     जिनसे मांग- मांग  कर घर भरते,
      नेताजी बन जाते हमारे अन्नदाता। 





क्रिसमस दिवस

बच्चो आज सुनो कहानी तुम संत निकोलस की। सदा चला जो राहों पर अपने पैगंबर जीजस की। राजा के घर जन्मा उसे सदा गरीबों से प्यार रहा। निर्धन की सेवा...