यह ब्लॉग खोजें

शनिवार, 10 दिसंबर 2022

हालात.....

महंगी हो गई  हर चीज, 
 बाजार जा के क्या करूँ।
  पल में नहीं है एक धेला,
   मैं किसको  क्या खरीदूँ।

पास जितना भी प्यार था,
 सब कब का लुट चुका।
  रहने को जो भी ये घर था,
   वो अदद भी बिक चुका।

बस  बेघर हो गया हूँ अब,
 इधर उधर मैं भटक रहा। 
  थर थरा रहे हैं अब कदम,
   चलने में  दम निकल रहा।

अब नजर भी कम हो गई,
  कैसे किसी को पहचान लूँ।
  जाकर किसी दुकानदार से,
   अब थोड़ा सा उधार मांग लूँ।

कोई टिप्पणी नहीं:

क्रिसमस दिवस

बच्चो आज सुनो कहानी तुम संत निकोलस की। सदा चला जो राहों पर अपने पैगंबर जीजस की। राजा के घर जन्मा उसे सदा गरीबों से प्यार रहा। निर्धन की सेवा...