फूल देई छम्मा देई,य भुकि चाटि अम्मा लेई ।
फूल फूल त्यर भनार,भरी रौ सबोंक भकार।
दैंण रहौ सबौंक द्वार,फूल देईक छा त्योहार।
हाथम गुड़कि डई धरी,यूं फूलों टुपरि पकड़ी।
दूध भात खूब खया तुम मुलमुल हंसनें रैया।
सारिपन दौड़ लगाइ फूल पिहूली टिपि ल्याइ।
बच्चो आज सुनो कहानी तुम संत निकोलस की। सदा चला जो राहों पर अपने पैगंबर जीजस की। राजा के घर जन्मा उसे सदा गरीबों से प्यार रहा। निर्धन की सेवा...
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